जिंक सल्फेट
विभिन्न राज्यों की मिट्टी मे जिंक की कमी
| राज्य | नमूने
विश्लेषण की संख्या |
नमूनों
में कमी का प्रतिशत |
| आंध्र प्रदेश | 4,405 |
51 |
| असम | 1,512 |
1-63 |
| बिहार | 10,779 |
45 |
| गुजरात | 21,994 |
26 |
| हरियाणा | 14,472 |
77 |
| कर्नाटक | 23,224 |
88 |
| केरल | 633 |
33 |
| मध्य प्रदेश | 6,664 |
64 |
| उड़ीसा | 6,031 |
15-88 |
| पांडिचेरी | 3,675 |
8 |
| पंजाब | 13,341 |
53 |
| तमिलनाडु | 10000 |
37 |
| उत्तर प्रदेश | 13,344 |
64 |
| पश्चिम बंगाल | 1,941 |
9-68 |
पौधों के शरीर में 70 तत्व पाये जाते हैं जिनमें से 16 तत्व पौधौं के बढ़वार के लिए अति आवश्यक होते हैं । इनमें से 9 तत्वों की आवश्यकता आधिक मात्रा में होती है अतः इन्हें मुख्य तत्व कहा जाता है, शेष 7 तत्वों को सूक्ष्म तत्व कहते हैं इनके नाम लोहा, जस्ता, मैंगनीज, वोरान, तांबा, मोलीव्डेनम तथा क्लोराइड हैं । इनकी आवश्यकता पौधौं में सूक्ष्म मात्रा में होती है परन्तु पौधौं की वृद्धी व विकास में इनका विशिष्ट योगदान होता है । इनकी उपलब्धता पौधौं को आपना जीवन वृत पूरा करने के लिए अति आवश्यक होता है । प्रत्येक सूक्ष्म तत्व की आवश्यकता के साछ इनका कार्य अतिविशिष्ट होता है । इन सूक्ष्म तत्वों में जस्ता (जिंक या Zn) का योगदान महत्वपूर्ण माना जा रहा है । इस तत्व की कमी के प्रति पौधे अति संवेदनशील होते हैं एवं व्यापकता से इसकी कमी देखी जा रही है
फसलों की प्रतिक्रिया
| Crop | No. of Experiments |
Range of response (q/ha) |
Average response (q/ha) |
| Wheat | 2358 |
2.9-17.8 |
3.6 |
| Rice | 1599 |
2.9-7.0 |
5.4 |
| Maize | 278 |
2.5-8.5 |
4.6 |
| Barley | 17 |
4.9-7.3 |
5.5 |
| Sorghum | 75 |
2.1-6.0 |
3.6 |
| Pearl Millet | 227 |
1.7-4.6 |
1.7 |
| Finger Millet | 47 |
3.1-4.2 |
3.6 |
| Chickpea | 14 |
2.3-5.6 |
3.2 |
| Ground nut | 76 |
2.1-4.7 |
3 |
एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार छत्तीसगढ़ में लिए गये मिट्टी के नमूनो में 45% में जिंक की कमी पायी गई है । छत्तीसगढ़ अंचल में कम उत्पादन एवं निम्न उत्पाद गुणवत्ता का मुख्य कारण उर्वरकों का कम व असंतुलित प्रयोग जिसमें जिंक का भी कम प्रयोग किया जाना है । लगातार अधिक उत्पादन लेते रहने के कारण व मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों के लगातार दोहन के कारण सूक्ष्म तत्वों का ह्रास होता रहता है । सूक्ष्म तत्वों की भरपाई अन्य मुख्य तत्वों की तुलना में न होने के कारण उत्पादन एवं गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ता है ।
