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जिंक सल्फेट?

पौधों की स्वस्थ वृद्धि के लिए बहुत से खनिज पदार्थ आवश्यक होते हैं । पौधौं के रसायनिक विश्लेषण से पता चलता है कि पौधों के शरीर में 70 तत्व पाये जाते हैं जिनमें से 16 तत्व पौधौं के बढ़वार के लिए अति आवश्यक होते हैं । इनमें से 9 तत्वों की आवश्यकता आधिक मात्रा में होती है अतः इन्हें मुख्य तत्व कहा जाता है, शेष 7 तत्वों को सूक्ष्म तत्व कहते हैं इनके नाम लोहा, जस्ता, मैंगनीज, वोरान, तांबा, मोलीव्डेनम तथा क्लोराइड हैं । इनकी आवश्यकता पौधौं में सूक्ष्म मात्रा में होती है परन्तु पौधौं की वृद्धी व विकास में इनका विशिष्ट योगदान होता है । इनकी उपलब्धता पौधौं को आपना जीवन वृत पूरा करने के लिए अति आवश्यक होता है । प्रत्येक सूक्ष्म तत्व की आवश्यकता के साछ इनका कार्य अतिविशिष्ट होता है ।


Zinc

इन सूक्ष्म तत्वों में जस्ता (जिंक या Zn) का योगदान महत्वपूर्ण माना जा रहा है । इस तत्व की कमी के प्रति पौधे अति संवेदनशील होते हैं एवं व्यापकता से इसकी कमी देखी जा रही है । एक वैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार छत्तीसगढ़ में लिए गये मिट्टी के नमूनो में 45% में जिंक की कमी पायी गई है । छत्तीसगढ़ अंचल में कम उत्पादन एवं निम्न उत्पाद गुणवत्ता का मुख्य कारण उर्वरकों का कम व असंतुलित प्रयोग जिसमें जिंक का भी कम प्रयोग किया जाना है । लगातार अधिक उत्पादन लेते रहने के कारण व मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों के लगातार दोहन के कारण सूक्ष्म तत्वों का ह्रास होता रहता है । सूक्ष्म तत्वों की भरपाई अन्य मुख्य तत्वों की तुलना में न होने के कारण उत्पादन एवं गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ता है ।