| मिट्टी में मिलाकर : |
| सामान्य भूमि में जिंक सल्फेट ओ.सी.आई. 21% जिंक का प्रयोग 25 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर की दर से उपयुक्त रहता है परन्तु क्षारीय भूमि में यह मात्रा 50 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर उचित पाई गई है। जिंक की सम्पूर्ण मात्रा बुवाई के समय नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाशधारी उर्वरकों देते समय मिट्टी में मिलाकर प्रयोग करना अत्यधिक सार्थक एवं लाभकारी होता है।
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| पर्णीय छिड़काव : |
| किसी कारण वश खेत में जिंक का प्रयोग नहीं किया गया और खड़ी फसल में जिंक की कमी अनुभव की जाये तो जिंक सल्फेट का पर्णीय छिड़ाव किया जा सकता है। पर्णीय छिड़काव के लिए 5 कि.ग्रा. ओ.सी.आई. 21% जिंक सल्फेट और 2.5 कि.ग्रा. बुझे हुए चुने को पांच सौ लीटर पानी में घोलकर पत्तियों पर इसका छिड़काव करना चाहिये। अगला छिड़काव 10 दिन अंतर पर अवश्य कर देना चाहिए। |
| पौधे जड़ उपचार : |
| ओ.सी.आई. 21% जिंक सल्फेट की 5 कि.ग्रा. मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर साफ टंकी में रखें। इस घोल में नर्सरी की जड़ों को पंद्रह मिनट तक डुबाने के बाद रोपाई करने पर लाभ मिलता है। |
| ड्रेसिंग : |
| फलों के उद्दान में पेड़ों की कटाई या छटाई के भाग पर जिंक सल्फेट का लेप लगाने से पौधों को जिंक उपलब्ध हो जाता है। |